Published on: 27 Apr 2026
आईजीयू में “प्रोफेशनल स्किल्स और एआई”पर ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित।
इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर, रेवाड़ी के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग द्वारा “प्रोफेशनल स्किल्स एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)” विषय पर एक दिवसीय ऑनलाइन सेमिनार सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राव मोहर सिंह चेयर एवं इंस्टीट्यूशन्स इनोवेशन काउंसिल (IIC) के सहयोग से आयोजित हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रोफेसर सविता श्योराण द्वारा औपचारिक स्वागत के साथ किया गया। उन्होंने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का अभिनंदन करते हुए कार्यशाला के उद्देश्यों और विषयवस्तु का विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रोफेशनल स्किल्स तथा एआई के व्यावहारिक उपयोग से अवगत कराना है, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें। उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार, शोध एवं व्यावहारिक ज्ञान पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने ऐसे आयोजनों को छात्रों के समग्र विकास के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। इसके साथ ही उन्होंने एआई के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 2030 तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) वैश्विक अर्थव्यवस्था में लगभग 15.7 ट्रिलियन डॉलर का योगदान देने की क्षमता रखती है। वर्तमान समय में विश्वभर के 75% से अधिक संस्थान एआई तकनीकों में निवेश कर रहे हैं, जो इसके बढ़ते प्रभाव और उपयोगिता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आने वाले वर्षों में एआई का बाजार आकार 2027 तक 7 से 10 ट्रिलियन डॉलर के बीच पहुंचने का अनुमान है। उन्होंने विशेष रूप से जनरेटिव एआई के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि यह ज्ञान-आधारित कार्यों में उत्पादकता को लगभग 30% - 40% तक बढ़ाने में सहायक हो सकता है। अंत में, उन्होंने विद्यार्थियों को नई तकनीकों को सीखने, डिजिटल कौशल विकसित करने तथा एआई के नैतिक और जिम्मेदार उपयोग को अपनाने के लिए प्रेरित किया, जिससे वे भविष्य में अधिक सक्षम और प्रतिस्पर्धी बन सकें।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर दिलबाग सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें उद्योग के लिए तैयार करना है। उन्होंने बताया कि आज के प्रतिस्पर्धी युग में संचार कौशल, टीम वर्क, नेतृत्व क्षमता एवं समस्या समाधान कौशल अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस न केवल तकनीकी क्षेत्र में बल्कि हर उद्योग में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रहा है। उन्होंने छात्रों को ऐसे कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि आने वाले समय में एआई एवं अन्य नवीनतम तकनीकों के बढ़ते उपयोग के कारण अधिक पेशेवर एवं विविध रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
मुख्य वक्ता के रूप में विशेषज्ञ मिस डिम्पल ने अपने व्याख्यान में प्रोफेशनल स्किल्स की आवश्यकता, इंटरव्यू की तैयारी, व्यक्तित्व विकास एवं उद्योग की वर्तमान मांगों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को इंफोसिस स्प्रिंगबोर्ड पर रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया भी समझाई। साथ ही, उन्होंने इस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध विभिन्न कोर्सों की संख्या, उनके लाभ तथा सर्टिफिकेशन प्राप्त करने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि इन कोर्सों से प्राप्त ज्ञान एवं प्रमाणपत्र प्रतिष्ठित कंपनियों में रोजगार प्राप्त करने में किस प्रकार सहायक सिद्ध होते हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने छात्रों को अपने कौशल को निरंतर विकसित करने तथा आत्मविश्वास के साथ अपने करियर की दिशा तय करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उभरते रुझानों और उसके वास्तविक जीवन में बढ़ते अनुप्रयोगों पर भी प्रकाश डाला। साथ ही, उन्होंने विद्यार्थियों को एआई आधारित टूल्स के प्रभावी उपयोग के माध्यम से अपनी कार्यक्षमता और नवाचार क्षमता बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सतिंदर बल ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ाते हैं तथा भविष्य के लिए उन्हें तैयार करते हैं।
विश्वविद्यालय एवं उससे संबद्ध महाविद्यालयों के 200 से अधिक विद्यार्थियों ने कार्यशाला में उत्साहपूर्वक भाग लिया और इससे महत्वपूर्ण ज्ञान एवं अनुभव प्राप्त किया। इस ऑनलाइन कार्यशाला में विभिन्न विभाग के शिक्षक गण, विद्यार्थी एवं शोधार्थियों और कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के गैर-शिक्षक कर्मचारी ने सक्रिय रूप से भाग लिया तथा आयोजन को सफल बनाने में पूर्ण सहयोग प्रदान किया।